चित्तौड़गढ़: आरटीई पुनर्भुगतान और विसंगतियों पर निजी स्कूलों का प्रदर्शन
शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन में स्पष्टता के अभाव और बकाया भुगतान न होने पर स्कूल संचालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

चित्तौड़गढ़ में आरटीई नियमों की विसंगतियों और तीन साल से बकाया पुनर्भुगतान की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन देते निजी स्कूल संचालक।
चित्तौड़गढ़। सरकार द्वारा आर टी ई के तहत निःशुल्क प्रवेश को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा आगामी सत्र को लेकर गाइडलाइन तो जारी कर दी गयी परन्तु इसमें कई प्रकार की विसंगतियों को लेकर प्रदेश के समस्त निजी विद्यालय असमंजस की स्थिति में है, जिसको लेकर प्रदेश भर में निजी विद्यालयों, अभिभावक संगठन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनो का ज्ञापन एवं धरने का दौर चालू है। इसी क्रम में जिले के समस्त निजी विद्यालय संचालकों द्वारा भी शिक्षा मंत्री के नाम जिला शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया।
गाइडलाइन में स्पष्टता का अभाव और एन्ट्री क्लास का विवाद
प्राइवेट स्कुल एसोसिएशन अध्यक्ष कैलाश वैष्णव ने बताया कि "विभाग द्वारा गाइड लाइन तो जारी कर दी गयी परन्तु प्रवेश एवं उसके पुनर्भुगतान को लेकर बिलकुल भी स्थिति स्पष्ट नही की है।" सुमित माहेश्वरी ने बताया कि "हाई कोर्ट के निर्देशानुसार एन्ट्री क्लास में प्रवेश हेतु निर्देश एवं समस्त निशुल्क शिक्षा कर रहे विद्यार्थिओं का अनिवार्य पुनर्भुगतान के स्पष्ट निर्देश किये गए थे परन्तु विभाग द्वारा स्पष्ट आदेश के पश्चात भी विभागीय गाइडलाइन में प्रत्येक विद्यालय के लिए एक साथ चार एन्ट्री क्लास रख दी गयी एवं पुनर्भुगतान के लिए भी कोई भी निर्देश नही दिए गए है।"
बकाया भुगतान और विभागीय वादाखिलाफी पर आक्रोश
जयश भटनागर ने बताया कि "समस्त निजी विद्यालयो द्वारा आर टी ई के दिशा निर्देशों के तहत पूर्ण निष्ठा से विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा तो प्रदान की जा रही है परन्तु विभाग द्वारा अपनी ही कथनी को पूरा नही किया जा रहा है, पिछले 3 वर्षों से प्री प्राईमरी कक्षा में निःशुल्क अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों का पुनर्भुगतान नही किया गया एवं इस वर्ष भी हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी पुनर्भुगतान की स्थिति स्पष्ट नही कर असमंजस की स्थिति में रखा गया।"
दिलीप पोखरना ने बताया कि "विभाग द्वारा प्रति विद्यार्थी विद्यालय को दी जाने वाली पुनर्भरण राशि को लेकर भी अन्याय किया गया है, जहाँ हर विभाग एवं शिक्षा विभाग को लेकर भी हर वर्ष बजट को बढाया जा रहा है, जिससे सरकार की योजनाओं का उचित क्रियान्वयन हो सके परन्तु आर टी ई के अंतर्गत पढने वाले निम्न वर्ग के बच्चों और उन्हें पूर्ण निष्ठा के साथ पढ़ा रहे गैर सरकारी विद्यालयों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यव्हार कर उचित बजट पारित करना तो दूर वास्तविक यूनिट कास्ट जो योजना के प्रारंभ से ही निर्धारित थी उससे ही बहुत कम निर्धारित कर अन्याय पूर्ण निर्णय लिया गया है।"
आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी
कैलाश वैष्णव ने बताया कि "विभाग द्वारा पुनर्भुगतान के टाइम फ्रेम के अनुसार प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में दो बार भुगतान देने का प्रावधान है, परन्तु वर्ष समाप्ति तक भी भुगतान को लेकर किसी प्रकार की कार्यवाही नही की गयी है। वर्तमान में अभी इसको लेकर 950 करोड़ रुपये की राशि बकाया है और अगर यही स्थिति रही तो यह आंकड़ा एक भयावह स्थिति भी ले सकता है।" साथ ही निजी विद्यालय जब स्वपोषित संस्थान है और वह कई लोगो को रोजगार भी उपलब्ध करवाकर जब देशहित में अपना पूर्ण योगदान दे रहा है तो विद्यालय से जुड़े संचालक, कर्मचारी और अभिभावक के साथ ऐसा भेदभाव पूर्ण रवैया क्यों अपनाया जा रहा है, वैष्णव ने कहा कि "अगर इसी प्रकार से अन्यायपूर्ण व्यव्हार रहा तो मजबूरीवश समस्त गैर सरकारी विद्यालयों को उग्र आन्दोलन कर विद्यालय बंद कर घेराव करना पड़ेगा।"
ज्ञापन के दौरान धीरज बिलोची, रोहित नाहर, गुंजन गोठवाल, नफीस हुसैन, हीरालाल जाट, रविकान्त पालीवाल, प्रेमलता तिवाड़ी, योगेश अग्रवाल, रवि अग्रवाल, जितेश श्रीवास्तव, शेखर कुमावत, नरेन्द्र वर्मा, लक्ष्मण सिंह, अर्पित शर्मा, योगेश कन्नोजिया, अरुण कुमावत, प्रकाश चन्द्र चोधरी, कविता अरोड़ा, माया साहू आदि गैर शिक्षण संस्थान के समस्त संचालकगण उपस्थित थे।

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