चित्तौड़गढ़: प्रवीण वाल्मीकि की मौत पर गहराया रहस्य, परिजनों ने जताई लूट के बाद हत्या की आशंका, उच्चस्तरीय जांच की मांग
चित्तौड़गढ़ के पहुंना में प्रवीण वाल्मीकि की संदिग्ध मौत ने पकड़ा तूल। परिजनों ने कार हादसे को बताया लूट के बाद की गई हत्या। गायब मोबाइल, नकदी और मौके पर मिले संदिग्ध साक्ष्यों ने पुलिस की थ्योरी पर उठाए सवाल। वाल्मीकि समाज ने जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच और न्याय की मांग की है।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में रश्मि क्षेत्र के पहुंना मार्ग पर हुए एक कार हादसे ने अब एक संदिग्ध और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। बीते 2 जनवरी को लालपुरा रास्ते पर हुई प्रवीण वाल्मीकि की मृत्यु को जहां शुरुआती जांच में पुलिस एक साधारण सड़क दुर्घटना मान रही है, वहीं मृतक के परिजनों और समस्त वाल्मीकि समाज ने इसे सोची-समझी साजिश और लूट के बाद की गई हत्या करार दिया है। न्याय की गुहार लगाते हुए समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला पुलिस अधीक्षक के द्वार पर दस्तक दी और इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए ज्ञापन सौंपा।
घटनाक्रम के अनुसार, पहुंना निवासी प्रवीण वाल्मीकि की कार 2 जनवरी को पहुंना से महज तीन किलोमीटर दूर लालपुरा रास्ते पर दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में मिली थी। कार से कुछ ही दूरी पर प्रवीण का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। हालांकि पुलिस की प्राथमिक थ्योरी कार के अनियंत्रित होकर पलटने की ओर इशारा कर रही है, लेकिन मौके के साक्ष्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। परिजनों का तर्क है कि दुर्घटनास्थल पर प्रवीण के पास मौजूद मोबाइल, नकदी से भरा बैग और यहां तक कि कार की स्टेफनी भी गायब थी। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मृतक के मोजे खुले हुए थे और शव के पास बेडशीट का एक टुकड़ा मिला, जो किसी सामान्य सड़क हादसे में संभव नहीं दिखता।
ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन को अवगत कराया कि जिस मार्ग पर यह हादसा हुआ, वह पूर्व में भी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। वहां पहले भी दो-तीन बार लूटपाट, मारपीट और वाहनों को आग लगाने जैसी गंभीर घटनाएं घटित हो चुकी हैं। इन तमाम कड़ियों को जोड़ते हुए वाल्मीकि समाज ने आशंका व्यक्त की है कि प्रवीण को पहले लूटा गया और फिर साक्ष्यों को मिटाने के लिए उसे मौत के घाट उतारकर हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।
न्याय की इस मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने के दौरान मृतक के पिता बंशीलाल नकवाल के साथ विजय चौहान, प्रकाश राठौड़, राजन मल्हौत्रा, छवि देशबन्धु, रतन लोठ, हरीश घावरी, देवीलाल नकवाल, शम्भूलाल नकवाल, डालचंद नकवाल, दिनेश नकवाल, अशोक नकवाल, नरेश नकवाल और छोटू सहित समाज के कई प्रबुद्धजन और युवा मौजूद रहे। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई उजागर नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन गंभीर बिंदुओं पर गौर करते हुए मामले की दिशा बदलता है या नहीं।

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