चित्तौड़गढ़ में महावीर इंटरनेशनल की वार्षिक सभा में अध्यक्ष अभय संजेती ने 'समयदान' का भावुक आह्वान किया। उन्होंने सदस्यों से हर महीने 4 घंटे असहायों की सेवा में लगाने की अपील की, जिसे संरक्षक डॉ. ए. एल. जैन की उपस्थिति में सभी ने संकल्प लेकर स्वीकार किया। सेवा और मानवता को समर्पित इस समाचार की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

चित्तौड़गढ़। समाज की वास्तविक प्रगति केवल गगनचुंबी इमारतों या भौतिक संसाधनों के संचय से नहीं, बल्कि एक संवेदनशील हृदय और निस्वार्थ सेवा भाव से मापी जाती है। इसी उदात्त विचार को ध्येय मानकर महावीर इंटरनेशनल के नेत्र चिकित्सालय परिसर में आयोजित वार्षिक सभा एक भावुक और प्रेरणादायी संगम की गवाह बनी। सभा के दौरान संस्था के अध्यक्ष अभय संजेती ने जब सदस्यों के सम्मुख अपनी बात रखी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति सेवा के एक नए आयाम से परिचित हुआ। उन्होंने अत्यंत भावपूर्ण स्वर में सदस्यों से धन या पद नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे मूल्यवान अंश यानी 'समय' मांगा।

अध्यक्ष अभय संजेती ने अपने संबोधन में एक ऐसी अपील की जिसने सभा में उपस्थित सभी लोगों के हृदय को झकझोर दिया। उन्होंने प्रत्येक सदस्य से प्रति माह मात्र चार घंटे का 'समयदान' करने का आह्वान किया। संजेती ने इस संक्षिप्त अवधि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये चार घंटे सुनने में भले ही अल्प लगें, लेकिन ये किसी असहाय के मुरझाए चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकते हैं, किसी भटके हुए बच्चे के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं और किसी पीड़ित के मन में यह अटूट विश्वास जगा सकते हैं कि इस दुनिया में वह अकेला नहीं है। उनका तर्क स्पष्ट था कि वास्तविक सेवा के लिए किसी बड़े पद या अपार धन-संपत्ति की अनिवार्यता नहीं होती; इसके लिए केवल एक संवेदनशील मन और थोड़ा सा समय ही पर्याप्त है।

इस आह्वान का असर सभा में तुरंत दिखाई दिया। सेवा की इस पुकार पर प्रतिक्रिया देते हुए वहां उपस्थित समस्त सदस्यों ने संरक्षक डॉ. ए. एल. जैन के नेतृत्व में एक साथ अपने हाथ उठाकर इस 'समयदान' के संकल्प को दोहराया। डॉ. ए. एल. जैन की उपस्थिति में ली गई इस शपथ ने कार्यक्रम में एक आधिकारिक और आध्यात्मिक गंभीरता भर दी। पिछले अनुभवों और आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि संस्था का लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। इस आयोजन ने न केवल संस्था की एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह संदेश भी प्रसारित किया कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपना थोड़ा सा समय रचनात्मक कार्यों में लगाए, तो एक बड़े सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है। यह सभा केवल एक औपचारिक बैठक न रहकर, चित्तौड़गढ़ में सेवा के एक नए युग की शुरुआत के रूप में संपन्न हुई।

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