चित्तौड़गढ़ से उदयपुर संभाग के 500 वरिष्ठ नागरिकों का दल विशेष ट्रेन द्वारा जगन्नाथ पुरी तीर्थ यात्रा के लिए रवाना हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर देवस्थान विभाग द्वारा आयोजित इस यात्रा में चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, सलूंबर और प्रतापगढ़ के चयनित बुजुर्ग शामिल हैं। प्रशासन ने रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत कर यात्रियों को विदा किया, जिससे बुजुर्गों में भारी उत्साह और भक्ति का माहौल देखा गया।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान की पावन धरा से भक्ति और श्रद्धा का एक अनुपम दृश्य उस समय जीवंत हो उठा, जब सोमवार को उदयपुर संभाग के सैकड़ों वरिष्ठ नागरिकों की टोली भगवान श्री जगन्नाथ के चरणों में शीश नवाने के लिए रवाना हुई। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत भक्ति भाव से सराबोर लगभग 500 तीर्थयात्रियों का यह जत्था चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से एक विशेष वातानुकूलित ट्रेन के जरिए ओड़िशा स्थित जगन्नाथ पुरी के लिए प्रस्थान कर गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी पहल और देवस्थान विभाग के मंत्री जोराराम कुमावत के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित यह यात्रा उन बुजुर्गों के सपनों को साकार कर रही है, जो जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थाटन की अभिलाषा रखते थे।

जैसे ही स्टेशन पर ट्रेन खड़ी हुई, पूरा वातावरण 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त जतिन कुमार गांधी ने इस आयोजन की गरिमा को रेखांकित करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक धार्मिक यात्रा संपन्न कराना है। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे। नोडल अधिकारी तिलकेस जोशी, सहायक नोडल अधिकारी जगदीश चंद्र जीनगर और मनीष की देखरेख में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ यात्रियों को यात्रा से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ प्रदान करने के साथ-साथ उनके सुखद सफर के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई गईं।

इस यात्रा की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें संपूर्ण उदयपुर संभाग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्राप्त विवरण के अनुसार, इस दल में उदयपुर जिले से 200, राजसमंद से 90, चित्तौड़गढ़ से 136, प्रतापगढ़ से 53 और नवगठित सलूंबर जिले से 21 वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए हैं। राज्य सरकार की संवेदनशीलता तब और निखर कर सामने आई जब स्टेशन पर प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों का फूल-मालाओं के साथ आत्मीय स्वागत किया। बुजुर्गों के चेहरों पर झलकता संतोष और आंखों में भक्ति की चमक इस योजना की सफलता की गवाही दे रही थी। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामाजिक सरोकारों और वरिष्ठ जनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

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