चित्तौड़गढ़: गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर गूंजे शौर्य के जयकारे, विधायक आक्या ने टेका मत्था
चित्तौड़गढ़ के प्रताप नगर गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने मत्था टेककर आशीर्वाद लिया और गुरु साहब के शौर्य को प्रेरणा का प्रतीक बताया। शबद कीर्तन और भव्य लंगर में बड़ी संख्या में विभिन्न समाज के लोगों ने भाग लेकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।

चित्तौड़गढ़। त्याग, तपस्या और वीरता की पावन धरा चित्तौड़गढ़ में सिखों के दसवें गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। सोमवार को प्रताप नगर स्थित सिख गुरुद्वारे में आयोजित इस धार्मिक समारोह में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही गुरुद्वारे के प्रांगण में शबद कीर्तन की गूंज सुनाई देने लगी, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया। कार्यक्रम के आयोजक मोनु सलुजा ने जानकारी दी कि प्रातःकाल से ही गुरुद्वारे में विशेष अरदास और कीर्तन के दौर शुरू हो गए थे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की।
इस पावन अवसर पर क्षेत्रीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका और गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु गोबिंद सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद विधायक आक्या ने शबद कीर्तन का श्रवण किया। संगत को संबोधित करते हुए विधायक ने गुरु गोबिंद सिंह जी के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। उन्होंने गुरु महाराज के उस अमर उद्घोष को दोहराया— "सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं।" आक्या ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी मात्र एक धार्मिक गुरु नहीं, बल्कि शौर्य, साहस और अटूट प्रेरणा के कालजयी प्रतीक हैं। उन्होंने अन्याय के विरुद्ध लड़ने का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी मानवता के लिए प्रासंगिक है। विधायक ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे गुरु साहब के महान विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करें और उनके बताए सत्य व सेवा के मार्ग पर चलें।
धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के पश्चात गुरुद्वारे में विशाल लंगर का आयोजन किया गया। इस लंगर की विशेषता यह रही कि इसमें जाति-पाति के भेदभाव से ऊपर उठकर सिख समाज के साथ-साथ अन्य समाजों के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस भव्य आयोजन में परमीत सिंह, ओमप्रकाश शर्मा, शैलेन्द्र झंवर, राजन माली, विनित तिवारी, सतपाल दुआ, जग्गु सोनी सहित कई प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। यह उत्सव न केवल गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम बना, बल्कि इसने समाज में आपसी भाईचारे और समरसता के संदेश को भी सुदृढ़ किया। गुरु गोबिंद सिंह जी का यह प्रकाश पर्व शहरवासियों के लिए प्रेरणा का एक ऐसा पुंज बनकर उभरा, जो धर्म और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प को दोहराता है।

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