चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में सुदर्शन सेवा संस्थान द्वारा रामायण मास परायण के समापन पर भव्य 101 कलश यात्रा और 12 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। 51 जोड़ों ने आहुतियां देकर जनकल्याण की कामना की। इसी अवसर पर युवाओं हेतु 'सुदर्शन व्यायाम शाला' का शुभारंभ हुआ, जहाँ कुश्ती व शस्त्र संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

चित्तौड़गढ़। भक्ति, शक्ति और सनातन परंपरा के अनूठे संगम के साथ चंदेरिया स्थित श्री खुट के बालाजी मंदिर परिसर सोमवार को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। सुदर्शन सेवा संस्थान द्वारा आयोजित एक वर्षीय रामायण मास परायण के पावन समापन पर आयोजित पूर्णाहुति कार्यक्रम ने समूचे क्षेत्र को धर्ममय कर दिया। आयोजन का आगाज़ स्टेशन वाले बालाजी मंदिर से हुआ, जहाँ 101 सौभाग्यवती माता-बहनों ने सिर पर मंगल कलश धारण कर भव्य कलश यात्रा निकाली। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के बीच यह यात्रा गवरियों का मोहल्ला और शीतला माता चौक होते हुए श्री खुट के बालाजी मंदिर पहुँची, जहाँ पुष्प वर्षा के साथ श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक समागम का स्वागत किया।

इस पुनीत अवसर पर लोक कल्याण और विश्व शांति की कामना के साथ 12 कुंडीय यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। यज्ञ की पवित्र वेदी पर 51 जोड़ों ने पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात जब महा आरती का आयोजन हुआ, तो समूचा वातावरण 'बालाजी महाराज' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्ति के इस प्रवाह के साथ ही सामाजिक सरोकार और युवाओं को संस्कारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। श्री खुट के बालाजी मंदिर परिसर में ही 'सुदर्शन व्यायाम शाला' का विधिवत शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि कन्हैया सुवालका ने मौली बांधकर और दीप प्रज्वलित कर व्यायाम शाला का उद्घाटन किया। आगामी समय में इस केंद्र पर युवाओं को कुश्ती के दांव-पेंच के साथ-साथ शस्त्र संचालन का भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो आत्मरक्षा और शारीरिक सुदृढ़ता की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा।

कार्यक्रम की सफलता में स्थानीय कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों की महती भूमिका रही। नितेश शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे आयोजन के सुव्यवस्थित संचालन में राकेश जायसवाल, ताराचंद्र, मनोज शर्मा, प्रफुल्ल जायसवाल, प्रतीक शर्मा, अंश शर्मा, योगेश वाल्मीकि, प्रिंस जायसवाल, धीरज गवारिया, नकुल सिंह, रोशन शर्मा, प्रभात सिंह, अजय सुवालका, विपिन गर्ग, मुकेश शर्मा, अजय पाल सिंह, अजय वाल्मीकि, शुभम मांझी, सुरेश मीणा, किशोर मीणा, शांतिलाल बंजारा, कुणाल शर्मा, हरिशंकर शर्मा, देवव्रत शर्मा, ललिता शर्मा, अर्जुन प्रजापत, सिया बंजारा, कोमल प्रजापत और शांति देवी शर्मा सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। रामायण मास परायण का यह समापन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सुदर्शन व्यायाम शाला के रूप में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना।

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