बांसवाड़ा में आयोजित अभाविप चित्तौड़ प्रांत के 61वें अधिवेशन में छात्र शक्ति का भव्य संगम हुआ। भगवान बिरसा मुंडा सभागार में डॉ. पारस टांक को नया प्रांत अध्यक्ष और जितेंद्र लोधा को प्रांत मंत्री चुना गया। कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी और महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी की उपस्थिति में जनजातीय गौरव और संस्कृति संरक्षण पर मंथन के साथ चित्तौड़गढ़ जिले के युवा नेतृत्व को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

बांसवाड़ा/चित्तौड़गढ़। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) चित्तौड़ प्रांत का तीन दिवसीय वैचारिक समागम '61वाँ प्रांत अधिवेशन' वीर काला बाई नगर, बांसवाड़ा स्थित भगवान बिरसा मुंडा सभागार में पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रवाद के संगम वाले इस अधिवेशन ने न केवल छात्र शक्ति के संकल्प को दोहराया, बल्कि चित्तौड़ प्रांत को आगामी भविष्य के लिए नए नेतृत्व की टोली भी सौंपी। जिला अधिवेशन प्रमुख उमेश नाथ योगी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 3 से 5 जनवरी तक चले इस मंथन शिविर में चित्तौड़गढ़ जिले के 30 अपेक्षित कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।

अधिवेशन का विधिवत आगाज़ प्रेरणादायी प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ, जिसमें कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, कुलपति प्रो. केशव सिंह ठाकुर एवं डॉ. लोकेंद्र कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। अधिवेशन के दूसरे दिन की सुबह राष्ट्रभक्ति के स्वरों से गुंजायमान रही, जब निवर्तमान प्रांत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम शर्मा एवं प्रांत मंत्री जितेंद्र लोधा ने वंदे मातरम् गायन के मध्य ध्वजारोहण किया। संगठनात्मक प्रक्रियाओं के बीच प्रांत प्रास्ताविक और मंत्री प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसके पश्चात डॉ. पारस टांक ने प्रांत अध्यक्ष और जितेंद्र लोधा ने पुन: प्रांत मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व ग्रहण किया।

बौद्धिक सत्रों की श्रृंखला में 'स्वाधीनता संग्राम एवं संस्कृति संरक्षण में जनजातीय समाज का योगदान' विषय ने युवा तरुणाई के भीतर राष्ट्रबोध की एक नई लहर पैदा की। शिवगंगा समग्र ग्रामविकास परिषद के उपाध्यक्ष राजाराम कटारा ने मुख्य वक्ता के रूप में जनजातीय समाज के बलिदान और सांस्कृतिक विरासत की गहराई से युवाओं को रूबरू करवाया। मुख्य समारोह का शुभारंभ महामंडलेश्वर पूज्य उत्तम स्वामी, अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री देवदत्त जोशी, राष्ट्रीय मंत्री हर्षित ननोमा, प्रदीप कोठारी, विवेक रावत, डॉ. पारस टांक, जितेंद्र लोधा एवं चंचल तेजावत द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों ने छात्र शक्ति को राष्ट्र पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।

अधिवेशन के अंतिम पड़ाव यानी घोषणा सत्र में चित्तौड़गढ़ जिले के कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा। संगठन ने आगामी सत्र के लिए नवीन दायित्वों की घोषणा की, जिसमें प्रांत एसएफडी प्रमुख के रूप में आलोक सिंह राठौड़, प्रांत छात्रा प्रमुख नीलम मेहता, प्रांत एसएफएस संयोजक अर्पित वैष्णव, सोशल मीडिया प्रांत संयोजक राजेश गायरी, प्रांत इंडिजिनियस संयोजक हर्ष अग्रवाल, प्रांत खेल सह संयोजक विपुल सिंह राणावत और प्रांत राष्ट्रीय कला मंच सह संयोजक के रूप में सुमन जाट को जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही प्रांत कार्यकारिणी सदस्य के रूप में राजेश्वरी सेन, लोकेंद्र सिंह राजावत और धर्मेंद्र सुखवाल के नामों की घोषणा की गई। यह अधिवेशन न केवल संगठनात्मक विस्तार का साक्षी बना, बल्कि इसने चित्तौड़ प्रांत की युवा शक्ति को सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण की नई दिशा प्रदान की।

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