साधना के गौमटेश आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने ठुकराई गांव में प्रवचन के दौरान मोबाइल के संयमित उपयोग और धर्म की महत्ता पर भक्तों को संबोधित किया।

बेगूं उपखंड क्षेत्र के ग्राम ठुकराई में शुक्रवार को “साधना के गौमटेश” के रूप में विख्यात आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ससंघ (17 पिच्छी) का भव्य एवं मंगलमय प्रवेश हुआ। प्रातः 8:00 बजे गाजे-बाजे और गगनभेदी जयघोष के साथ संघ का गांव में भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर गुरुदेव की अगवानी की और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रातः 8:30 बजे आचार्य श्री ने आदिनाथ भगवान मंदिर में दर्शन किए, जिसके पश्चात सुबह 9:30 बजे मुनि संघ का प्रवचन आयोजित हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आचार्य श्री का प्रेरक उद्बोधन और जीवन दर्शन

अपने प्रेरक उद्बोधन में आचार्य श्री ने वर्तमान समय में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि — "तीन स्थानों पर मोबाइल का प्रयोग नहीं करना चाहिए—देवदर्शन के समय, भोजन के समय और शौच के समय।" उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को माह में कम से कम एक उपवास रखने की प्रेरणा दी। आचार्य श्री ने कहा कि — "होटल का भोजन स्वाद देता है, जबकि घर का भोजन स्वास्थ्य प्रदान करता है।" जीवन की अनिश्चितता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि — "समय कभी भी बदल सकता है, मृत्यु कभी भी आ सकती है, सांस कभी भी रुक सकती है और मन भी परिवर्तित हो सकता है।" इसलिए मानव जीवन में धर्म और भक्ति को सर्वोपरि स्थान देना चाहिए क्योंकि धन कमाना आवश्यक है, लेकिन जीवन में धर्म की गंगा भी बहती रहनी चाहिए।





च्वलेश्वर पार्श्वनाथ से नीमच की ओर विहार

आचार्य श्री का वर्तमान विहार प्रसिद्ध तीर्थ स्थल च्वलेश्वर पार्श्वनाथ से प्रारंभ होकर मध्यप्रदेश के नीमच की ओर गतिमान है। शुक्रवार दोपहर 2:00 बजे मुनि संघ ने ठुकराई से विहार कर चैची की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संघ का अभिनंदन किया। ठुकराई के जैन समाज एवं ग्रामीणों द्वारा जगह-जगह आकर्षक स्वागत द्वार सजाए गए थे।

विभिन्न क्षेत्रों से जुटे हजारों श्रद्धालु

इस अवसर पर बेगूं सहित आसपास के क्षेत्रों—चैची, नन्दवाई, मण्डलगढ़, कंकाल तलाई, चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा, बिजौलिया, देवली, जहाजपुर, नीमच एवं सिंगोली (म.प्र.)—से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह पूरा कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau

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