क्या भारत की GDP 2026 में 7.4% से ऊपर बढ़ेगी? जानें आज के मार्केट संकेत
क्या भारत 2026 में 7.4% से ऊपर GDP ग्रोथ हासिल करेगा? विशेषज्ञों के बीच मिश्रित अनुमानों और नवीनतम आर्थिक संकेतों के आधार पर जानिए कौन‑से कारक भारत की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं और क्या देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ रहा है।

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर चर्चा में बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025‑26 (FY26) के लिए GDP (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर को लेकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों तथा आर्थिक संगठनों के पूर्वानुमानों में फर्क देखने को मिल रहा है। इस बीच एक बड़ा सवाल उभर रहा है: क्या भारत 2026 में 7.4% से ज्यादा GDP ग्रोथ हासिल कर पाएगा? इस विषय पर आज के मार्केट संकेत और विशेषज्ञों की राय पर गहराई से नज़र डालते हैं।
सबसे पहले, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings ने भारत के लिए FY26 के GDP ग्रोथ अनुमान को 7.4% तक बढ़ाया है। एजेंसी का मानना है कि उपभोक्ता खर्च में वृद्धि और जीएसटी सुधारों के कारण मांग मजबूत बनी है, जिससे अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलेगा। यह पूर्वानुमान मार्च 2026 तक की उम्मीदों से बेहतर है और यह दर्शाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कुछ प्रमुख संकेतकों के आधार पर अच्छी रफ्तार पकड़ रही है।
यही नहीं, भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से भी पता चलता है कि FY26 की दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि दर 8.2% तक पहुँच गई, जो पिछले छः तिमाहियों में सबसे तेज़ वृद्धि दर रही है। इस तरह की मजबूत तिमाही वृद्धि यह संकेत देती है कि अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मजबूती मौजूद है।
हालाँकि, हालांकि कुछ रेटिंग एजेंसियाँ अधिक सकारात्मक संकेत दे रही हैं, वहीं अन्य आर्थिक संस्थाएँ थोड़ी सतर्कता बरत रही हैं। उदाहरण के तौर पर, OECD और S&P Global Ratings जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमान 6.5–6.7% के आसपास हैं। यह बढ़ती घरेलू खपत और निवेश की उम्मीदों के बावजूद थोड़ा कम संकेत देता है।
इसी प्रकार, Crisil और कई अन्य आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान भी लगभग 6.5% तक GDP ग्रोथ हुआ है, जो बाजार के कुछ हिस्सों में 7.4% से नीचे है। ये अनुमान यह दिखाते हैं कि GDP ग्रोथ पर असर डालने वाले वैश्विक जोखिम जैसे अमेरिका‑चीन व्यापार तनाव, उच्च टैरिफ और निर्यात दबाव अभी भी बनी हुई चुनौतियाँ हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी संस्थाएँ भी भारत के रुझान को अलग तरीके से देख रही हैं। IMF ने FY25–26 के लिए भारत की ग्रोथ दर को 6.6% तक बढ़ाया, जो पिछले अनुमानों से थोड़ा ऊपर है लेकिन 7.4% के मुक़ाबले कम है। इसका अर्थ यह है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए अग्रिम अनुमान अधिक सतर्क हैं।
इन सभी प्रक्षेपणों के बीच एक बात स्पष्ट है कि भारत की अर्थव्यवस्था अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी मजबूत है। उदाहरण के लिए, JPMorgan के अनुसार भारत के GDP ग्रोथ की अनुमानित सीमा 6–7% के बीच है, जो चीन जैसी अन्य कीमतदार अर्थव्यवस्थाओं की प्रक्षेपण दर से महत्वपूर्ण रूप से बेहतर रही।
बाज़ार संकेतों को पढ़ें तो कुछ कारण हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था को 7.4% के नज़दीक या उससे ऊपर ले जाने में मदद कर सकते हैं: ग्रीनफ़ील्ड निवेश में वृद्धि, GST दरों में समायोजन, कर राहत और घरेलू खपत की बढ़ती मांग। इन कारकों ने न केवल उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाया है बल्कि निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत उत्पन्न किए हैं।
दूसरी तरफ, जोखिम भी कम नहीं हैं। वैश्विक व्यापार विवाद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी, उच्च ब्याज दरों का असर, और निर्यात पर दबाव जैसी चुनौतियाँ GDP ग्रोथ को सीमित कर सकती हैं। ऐसे में 7.4% से अधिक की वृद्धि दर हासिल करना पूरी तरह पूर्वानुमान के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।
अंत में, विशेषज्ञों की राय यह है कि यदि उपभोक्ता खर्च और निवेश स्थिर रहता है, महंगाई नियंत्रण में बनी रहती है और घरेलू सुधारों में तेजी आती है, तो भारत 2026 में लगभग 7–7.4% की GDP वृद्धि दर हासिल करना संभव है। लेकिन 7.4% से ऊपर कोई बड़ी छलांग लगाने के लिए वैश्विक परिस्थितियों में अनुकूल बदलाव भी आवश्यक होंगे। इसीलिए आज के मार्केट संकेत मिश्रित होने के बावजूद उम्मीदों के लिए सकारात्मक संकेत भी देते हैं और चुनौतियों की चेतावनी भी।

