सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है, जहां चांदी ₹3500 तक सस्ती हो गई और सोने में भी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर की मजबूती और वैश्विक ब्याज दर संकेतों ने कीमती धातुओं के बाज़ार में अस्थिरता बढ़ा दी है।

कीमती धातुओं के बाज़ार में इस समय बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हालिया कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान आकर्षित हुआ है। विशेष रूप से चांदी की कीमतों में करीब ₹3500 तक की गिरावट ने बाज़ार में चर्चा को तेज़ कर दिया है, जबकि सोना भी अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे फिसलता दिखाई दिया है।

बाज़ार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर रुझानों और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू सर्राफा बाज़ार पर साफ़ दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग में बदलाव ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। इसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा, जहां लगातार बिकवाली देखी गई।

चांदी की कीमतों में आई तेज़ गिरावट को हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है। औद्योगिक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं ने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला है। चूंकि चांदी का उपयोग उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है, ऐसे में वैश्विक मांग से जुड़े संकेत इसके दामों को सीधे प्रभावित करते हैं। इसी कारण चांदी के दामों में ₹3500 तक की नरमी दर्ज की गई।

सोने की बात करें तो इसमें भी गिरावट का रुख देखने को मिला है। हाल के दिनों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी हुई थीं, लेकिन डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली की राह अपनाई। इसके परिणामस्वरूप सोने के दामों में भी गिरावट दर्ज की गई। बाज़ार संकेत दे रहे हैं कि अल्पकालिक दबाव के चलते सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

आधिकारिक और बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक मौद्रिक नीतियां इस गिरावट की एक अहम वजह हैं। प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेतों ने गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों, जैसे सोना और चांदी, की चमक को कुछ हद तक फीका किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं को महंगा बना दिया है, जिससे मांग पर असर पड़ा है।

घरेलू बाज़ार में इस गिरावट का असर आभूषण उद्योग और खुदरा ग्राहकों पर भी पड़ा है। कीमतों में आई नरमी से जहां उपभोक्ताओं को खरीदारी का अवसर मिल सकता है, वहीं व्यापारियों के लिए यह दौर सावधानी का संकेत दे रहा है। त्योहारी और शादी के मौसम से पहले कीमतों में इस तरह की हलचल को बाज़ार के लिए अहम माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों से जुड़े संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी। किसी भी नए आर्थिक संकेत या नीतिगत बयान से बाज़ार की चाल तेजी से बदल सकती है। ऐसे में कीमती धातुओं के बाज़ार में अस्थिरता बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अंततः, सोने और चांदी की कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट बाज़ार के बदलते रुझानों का स्पष्ट संकेत है। यह घटनाक्रम न केवल निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह गिरावट अस्थायी है या कीमती धातुओं के बाज़ार में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

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