दलाल स्ट्रीट पर 'ब्लैक मंडे' जैसी दहशत: मिडिल ईस्ट की जंग ने डुबोए निवेशकों के ₹10 लाख करोड़!
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से दलाल स्ट्रीट में हड़कंप! सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और निवेशकों के अरबों रुपये स्वाहा। जानें बाजार का ताजा हाल और विशेषज्ञों की राय।

Black Monday-like panic on Dalal Street
दलाल स्ट्रीट पर तनाव: मिडिल ईस्ट के संकट ने वैश्विक बाजारों को झकझोरा, भारतीय निवेशकों में भारी घबराहट
मुंबई/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक संकट का सीधा और तीखा असर भारतीय शेयर बाजार यानी दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिल रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है, बल्कि भारतीय निवेशकों की रातों की नींद भी उड़ा दी है। सोमवार और मंगलवार के कारोबारी सत्रों में बाजार में जो सुनामी आई, उसने पिछले कई महीनों की बढ़त को एक झटके में साफ कर दिया है।
बाजार में भारी गिरावट: आंकड़ों की जुबानी
ताजा आंकड़ों के अनुसार, दलाल स्ट्रीट में बिकवाली का ऐसा दौर चला कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए:
- सेंसेक्स का हाल: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स एक ही सत्र में लगभग 1,700 से 2,700 अंकों तक की भारी गिरावट के साथ खुला।
- निफ्टी की फिसलन: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 500 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।
- निवेशकों को नुकसान: इस बाजार क्रैश के कारण शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की लगभग ₹10 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई।
क्यों टूट रहा है बाजार? प्रमुख कारण
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल: मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी और संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में 8% से 13% तक का उछाल आया है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई बढ़ने का बड़ा संकेत है।
- सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव: युद्ध की स्थिति में निवेशक जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) में लगा रहे हैं। यही कारण है कि जहां शेयर गिरे, वहीं सोने के दाम ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए।
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे गिरावट और गहरी हो गई है।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित?
बाजार की इस गिरावट ने लगभग हर सेक्टर को प्रभावित किया है, लेकिन कुछ पर असर सबसे ज्यादा है:
- बैंकिंग और फाइनेंशियल: बैंक निफ्टी में 1300 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है।
- ऑटो और पेंट्स: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से टायर, पेंट और ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिससे इनके शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
- आईटी सेक्टर: वैश्विक मांग में कमी की आशंका से आईटी शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।
आगे क्या? विशेषज्ञों की राय
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या युद्ध लंबा खींचता है, तो बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव संभव है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि हर बड़ी गिरावट खरीदारी का एक मौका भी लाती है, बशर्ते निवेश लंबी अवधि के लिए किया जाए। फिलहाल निवेशकों को 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की नीति अपनानी चाहिए और पेनी स्टॉक्स से बचकर मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे वित्तीय सलाह न माना जाए। बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का कोई भी निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट या वित्तीय सलाहकार की सलाह पर ही लें।

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