सावधान! सिर्फ एक गलती और रिजेक्ट हो जाएगा कार इंश्योरेंस क्लेम, जानिए इंश्योरेंस कंपनी से पूरा पैसा वसूलने का 'सीक्रेट' तरीका...
सड़क दुर्घटना या वाहन चोरी होने पर इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें? जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और पुलिस रिपोर्ट की अहमियत। कैशलेस और रीइंबर्समेंट क्लेम में अंतर समझें और उन गलतियों से बचें जो आपका क्लेम रिजेक्ट करवा सकती हैं। वाहन मालिकों के लिए यह गाइड आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी।

वाहन इंश्योरेंस क्लेम की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसमें यह देखा जाता है कि वाहन का नुकसान या नुकसान की भरपाई आपके एक्टिव पॉलिसी कवर के तहत कैसे आंकी और सेटल की जाएगी। इस प्रक्रिया की समझ होने से घटना होने पर आप सही कदम उठा पाते हैं।
इसी पहलू में, यह गाइड कार इंश्योरेंस क्लेम फाइल करने के स्टैंडर्ड स्टेप्स और जरूरी दस्तावेज बताती है। साथ ही, हम उन प्रोसेस वाली गलतियों पर भी बात करेंगे जिनसे बचकर आप डॉक्यूमेंटेशन को आसानी से और साफ़ तरीके से पूरा कर सकते हैं।
क्लेम के प्रकार
मोटर इंश्योरेंस क्लेम मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं:
● ओन डैमेज क्लेम: एक्सीडेंट, आग, प्राकृतिक घटना, तोड़फोड़ या किसी भी कवर रिस्क से आपकी कार को नुकसान हुआ हो, तो उसकी रिपेयर या कम्पेन्सेशन का खर्च इसमें कवर होता है।
● थर्ड-पार्टी क्लेम: भारत में मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के अनुसार थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। इसमें किसी अन्य व्यक्ति को चोट, मृत्यु, या उसकी प्रॉपर्टी को नुकसान होने पर फाइनेंशियल कवर मिलता है।
● कॉम्प्रिहेन्सिव क्लेम: इसमें ओन डैमेज और थर्ड-पार्टी-दोनों कवर शामिल होते हैं। आप चाहें तो अपनी कार के खास हिस्सों के लिए ऐड-ऑन भी चुन सकते हैं।
स्टेप-बाय-स्टेप क्लेम फाइलिंग प्रक्रिया
कार इंश्योरेंस क्लेम का प्रोसेस स्ट्रक्चर्ड होता है। चलिए, हर स्टेप को एक-एक करके समझते हैं:
1. सेफ्टी सुनिश्चित करें और जगह को सेफ करें
सबसे पहले यह देखें कि व्यक्ति और आसपास की स्थिति सुरक्षित है। जरूरत हो तो प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित जगह पर ले जाएँ और फिर आगे के स्टेप्स करें ताकि क्लेम का काम आसान रहे।
2. पुलिस को सूचना दें (जहाँ लागू हो)
अगर एक्सीडेंट में बड़ा नुकसान हुआ है, जैसे शारीरिक चोट, थर्ड-पार्टी लॉस या चोरी, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें। साथ ही, एफआईआर दर्ज कराएँ और उसकी कॉपी सुरक्षित रखें। चोरी के मामलों में, अगर तय समय में वाहन नहीं मिलता, तो पुलिस से नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट भी लेना पड़ सकता है।
3. अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर को जल्दी सूचना दें
पुलिस को सूचना देने के साथ-साथ इंश्योरर को भी ऑफिशियल चैनल्स से क्लेम इंटिमेट करें, जैसे:
● इंश्योरर की वेबसाइट या मोबाइल ऐप
● टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर
● रजिस्टर्ड ईमेल या मैसेजिंग सर्विस
4. घटना का रिकॉर्ड तैयार करें
अगर एक्सीडेंट हुआ है, तो ये काम करें:
● डैमेज हुई कार और आसपास की जगह की फोटो लें।
● समय, तारीख और लोकेशन नोट करें।
● अगर थर्ड-पार्टी प्रभावित है, तो उसकी डिटेल्स लिखें।
● अगर गवाह उपलब्ध हों, तो उनका कॉन्टैक्ट नंबर लें।
5. क्लेम फॉर्म भरें
HDFC ERGO जैसे इंश्योरर क्लेम फॉर्म देते हैं ताकि जरूरी डिटेल्स व्यवस्थित तरीके से मिल जाएँ। फॉर्म सावधानी से, सही जानकारी के साथ भरें और अपने प्रोसेस के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल तरीके से सबमिट करें।
6. जरूरी दस्तावेज जमा करें
क्लेम पूरा करने के बाद आपको कुछ दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं। इसलिए ये रिकॉर्ड तैयार रखें:
● पूरा भरा और साइन किया हुआ क्लेम फॉर्म
● वाहन डैमेज की फोटो
● रिपेयर एस्टिमेट और फाइनल बिल
● रीइंबर्समेंट के लिए बैंक अकाउंट डिटेल्स
● इंस्पेक्शन के बाद सर्वेयर की रिपोर्ट
● इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी
● वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी)
● आपका ड्राइविंग लाइसेंस
● पुलिस एफआईआर या एक्सीडेंट रिपोर्ट, अगर लागू हो
7. सर्वेयर द्वारा इंस्पेक्शन
क्लेम रजिस्टर होने के बाद इंश्योरर एक लाइसेंस्ड सर्वेयर नियुक्त करता है, जो वाहन की जाँच करके डैमेज का आकलन करता है। सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर क्लेम अप्रूवल और सेटलमेंट अमाउंट तय होता है।
8. क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस
आप पॉलिसी टाइप के अनुसार कैशलेस या रीइंबर्समेंट क्लेम ले सकते हैं। कैशलेस का मतलब है इंश्योरर सीधे वर्कशॉप को पेमेंट करता है। रीइंबर्समेंट में आप पहले खर्च करते हैं और बाद में पॉलिसी कवरेज के हिसाब से खर्च की गई राशि का क्लेम करते हैं।
कैशलेस बनाम रीइंबर्समेंट
कैशलेस और रीइंबर्समेंट क्लेम में फर्क:
विशेषता | कैशलेस क्लेम | रीइंबर्समेंट क्लेम |
अग्रिम भुगतान | जरूरी नहीं | जरूरी |
नेटवर्क गैरेज | अनिवार्य | अनिवार्य नहीं |
आपकी जेब से खर्च | डिडक्टिबल तक सीमित | पहले पूरा भुगतान |
आम गलतियाँ जिनसे बचें
कुछ बातें हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है, ताकि आपका मोटर इंश्योरेंस क्लेम बिना रुकावट आगे बढ़े:
● दस्तावेज खो जाना या अमान्य होना: अधूरे सबमिशन क्लेम में देरी और रिजेक्शन की बड़ी वजह होते हैं।
● घटना की सूचना देने में देर: क्लेम इंटिमेशन में देरी पॉलिसी नियमों के खिलाफ जा सकती है और क्लेम की वैलिडिटी पर असर डाल सकती है।
● गलत जानकारी देना: पॉलिसी नंबर, घटना डिटेल्स या पर्सनल जानकारी में गलती से विवाद या री-प्रोसेसिंग हो सकती है।
● इंश्योरर की प्रक्रिया न मानना: अनऑफिशियल चैनल्स इस्तेमाल करना या तय स्टेप्स छोड़ना प्रोसेस में दिक्कत ला सकता है।
● टाइमलाइन और पॉलिसी टर्म्स: क्लेम प्रोसेसिंग पॉलिसी प्रावधानों, क्लेम की जटिलता और नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए डेडलाइन, डिडक्टिबल और एक्सक्लूजन जरूर देख लें।
अंतिम विचार
अगर आप सभी स्टेप्स सही क्रम में और तय समय के भीतर करते हैं, तो कार इंश्योरेंस क्लेम तेजी से और बिना उलझन के प्रोसेस हो सकता है। इसलिए फॉर्म में सही जानकारी भरें, जरूरी दस्तावेज जल्दी जमा करें, और इंस्पेक्शन व रिपेयर से जुड़े नियमों का पालन करें।
अगर आप भरोसेमंद मोटर इंश्योरेंस विकल्प देख रहे हैं, तो आप प्रमुख मोटर इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स की तुलना कर सकते हैं। कुछ कंपनियाँ कैशलेस गैरेज और जल्दी रिपेयर जैसी सुविधाएँ भी देती हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
