₹15 सस्ता भरपेट ‘जनता खाना’ योजना: क्या रेल यात्रियों के लिए गेम चेंजर?
भारतीय रेलवे ने ₹15 में भरपेट ‘जनता खाना’ योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य यात्रियों को किफायती, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच रेलवे ने गुणवत्ता और निगरानी का भरोसा दिलाया है।

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और किफायती भोजन की उपलब्धता को लेकर एक अहम पहल शुरू की है। केवल ₹15 में भरपेट ‘जनता खाना’ उपलब्ध कराने की यह योजना देशभर के रेलवे स्टेशनों पर लागू की जा रही है। जैसे ही इस योजना की घोषणा हुई, यह सोशल मीडिया से लेकर रेलवे प्लेटफॉर्म तक चर्चा का विषय बन गई। सवाल यही है कि क्या यह पहल वास्तव में रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव साबित होगी?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ‘जनता खाना’ का उद्देश्य उन यात्रियों को राहत देना है जो लंबी यात्राओं के दौरान महंगे भोजन या सीमित विकल्पों से जूझते हैं। योजना के तहत प्लेट में संतुलित और पौष्टिक भोजन परोसा जाएगा, जिसमें चावल, रोटी, दाल और सब्ज़ी जैसी मूल खाद्य सामग्री शामिल होगी। रेलवे का दावा है कि गुणवत्ता, स्वच्छता और समयबद्ध सेवा—तीनों मानकों पर सख़्त निगरानी रखी जाएगी।
रेलवे बोर्ड से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, दैनिक यात्रियों, श्रमिकों और छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। स्टेशन परिसरों में पहले से संचालित खानपान इकाइयों के साथ समन्वय कर भोजन की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही, भोजन की कीमत तय करते समय लागत नियंत्रण और सब्सिडी मॉडल को अपनाया गया है ताकि ₹15 की दर को बनाए रखा जा सके।
घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कई यात्रियों ने इसे “रेलवे की जन-हितैषी सोच” बताया, वहीं कुछ ने सवाल उठाए कि इतनी कम कीमत पर भोजन की गुणवत्ता और पोषण संतुलन कैसे सुनिश्चित होगा। इन चिंताओं के जवाब में रेलवे प्रशासन ने कहा कि भोजन की सामग्री और रसोई संचालन की नियमित जांच की जाएगी और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी सक्रिय रहेगी।
रेलवे के अनुसार, यह पहल केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी विस्तार है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में भोजन महंगा होता जा रहा है। ‘जनता खाना’ से इस अंतर को पाटने का प्रयास किया गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिन स्टेशनों पर यह योजना सफल रही, वहां आगे चलकर मेन्यू में विविधता पर भी विचार किया जा सकता है।
मौजूदा समय में महंगाई और यात्रा खर्च बढ़ने के बीच यह योजना यात्रियों के बजट पर सीधा असर डाल सकती है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिदिन लाखों यात्री स्टेशन परिसरों से गुजरते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अल्प आय वर्ग की है। ऐसे में किफायती भोजन की उपलब्धता से उनकी दैनिक जरूरतों को सहारा मिल सकता है।
हालांकि, रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के क्रियान्वयन के शुरुआती चरण में फीडबैक के आधार पर सुधार किए जाएंगे। गुणवत्ता से समझौता न हो, इसके लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट और समय-समय पर निरीक्षण की व्यवस्था रखी गई है। इसके साथ ही, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं पर जवाबदेही तय करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
अंततः, ₹15 में भरपेट ‘जनता खाना’ योजना भारतीय रेलवे की उस दिशा को दर्शाती है, जहां यात्री सुविधा और सामाजिक सरोकार प्राथमिकता बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह पहल कितनी व्यापक रूप से लागू होती है और यात्रियों के अनुभव में कितना ठोस बदलाव लाती है। फिलहाल, यह योजना रेलवे के जन-केंद्रित दृष्टिकोण की एक महत्वपूर्ण झलक पेश करती है।

