बिहार के औरंगाबाद में एक साथ उठी 4 अर्थियां ; पुलिस की तफ्तीश में हुए खुलासे से काँप जाएगी रूह, जानें पूरी वारदात
बिहार के औरंगाबाद जिले के मति बीघा गांव में 29 जनवरी 2026 को पांच किशोरियों द्वारा जहरीला पदार्थ खाने की घटना में चार की मौत हो गई। पारिवारिक डांट के बाद उठाए गए इस कदम ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

अर्थी सांकेतिक तस्वीर
बिहार के औरंगाबाद जिले से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे इलाके को शोक और स्तब्धता में डुबो दिया है। 29 जनवरी 2026 की दोपहर, खेलती-कूदती उम्र की पांच सहेलियों ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की थी। एक मामूली पारिवारिक डांट के बाद लिया गया यह निर्णय चार मासूम जिंदगियों के अंत का कारण बन गया।
घटना औरंगाबाद जिले के मति बीघा गांव की है, जहां 10 से 14 वर्ष की उम्र की पांच किशोरियां एक साथ गांव के बाहर खेत की ओर चली गईं। बताया जाता है कि वहां पहुंचकर उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर में चार लड़कियां खेत में ही गिर पड़ीं और उनकी मौत हो गई। पांचवीं लड़की ने कथित तौर पर जहर थूक दिया और किसी तरह घर लौट आई। उसी के जरिए इस भयावह घटना का खुलासा हुआ।
डांट से शुरू हुई त्रासदी:
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन किशोरियों को परिवार वालों ने कुछ समय पहले लड़कों के साथ देखे जाने पर फटकार लगाई थी। बताया जा रहा है कि इसी बात से आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह फैसला आवेश और भावनात्मक क्षण में लिया गया प्रतीत होता है। जीवित बची लड़की के बयान में भी यही संकेत मिला है कि घटना पूर्व नियोजित न होकर अचानक लिए गए निर्णय का परिणाम थी।
जांच की दिशा:
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- क्या यह वास्तव में सामूहिक आत्महत्या का मामला है?
- क्या किसी प्रकार का दबाव या उकसावे की भूमिका रही?
- जहरीले पदार्थ का स्रोत क्या था?
पुलिस जीवित बची किशोरी के बयान और अन्य साक्ष्यों की गहन समीक्षा कर रही है ताकि घटना के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके।
एक साथ उठीं चार अर्थियां:
गांव में उस समय मातम पसरा रहा, जब चारों किशोरियों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। पूरे गांव की आंखें नम थीं और परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह घटना न केवल एक परिवार की, बल्कि पूरे समुदाय की त्रासदी बन गई।
इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीण समाज में किशोर मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और सामाजिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है। कम उम्र में भावनात्मक आघात और सामाजिक संकोच किस हद तक बच्चों को प्रभावित कर सकता है, यह घटना उसका कठोर उदाहरण बनकर सामने आई है। औरंगाबाद की यह घटना सिर्फ चार जिंदगियों का अंत नहीं, बल्कि उन अनकहे दबावों और संवादहीनता की कहानी है, जो कभी-कभी मासूम उम्र को असहनीय बोझ तले दबा देती है। प्रशासन की जांच जारी है, लेकिन इस त्रासदी ने समाज के सामने कई गहरे प्रश्न छोड़ दिए हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
