जीतन राम मांझी और कुशवाहा के बीच फंसी BJP; किसे मिलेगी राज्यसभा की चाबी?
Rajya Sabha Election 2026 : क्या बीजेपी में होगा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का विलय? दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और सीटों के समीकरण पर विशेष रिपोर्ट।

Ram Manjhi and Kushwaha
Rajya Sabha Election 2026 : बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ गठबंधन की मर्यादा और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच की लकीर धुंधली होती दिख रही है। राज्यसभा चुनाव की नामांकन तिथि 5 मार्च जैसे-जैसे करीब आ रही है, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की अचानक दिल्ली यात्रा ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने कुशवाहा को विशेष चर्चा के लिए दिल्ली तलब किया है। इस मुलाकात के केंद्र में न केवल राज्यसभा की उम्मीदवारी है, बल्कि चर्चा इस बात की भी है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का अस्तित्व समाप्त कर उसे भारतीय जनता पार्टी में विलीन कर देंगे।
वादे और वर्तमान का पेचीदा समीकरण :
उपेंद्र कुशवाहा की वर्तमान स्थिति काफी नाजुक और दिलचस्प है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जब उनकी पार्टी ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी, तब कथित तौर पर यह सहमति बनी थी कि उन्हें राज्यसभा और विधान परिषद (MLC) में एक-एक सीट दी जाएगी। हालांकि, इस 'जेंटलमैन एग्रीमेंट' का अब तक कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। पेच तब और फंस गया जब कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिहार सरकार में मंत्री बनवाया, जो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में कुशवाहा के सामने दोहरी चुनौती है: अपनी राज्यसभा सीट बचाना और बेटे के लिए विधान परिषद में जगह सुनिश्चित करना।
बीजेपी की 'विलय' वाली शर्त ?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि बीजेपी ने कुशवाहा के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। अटकलें हैं कि बीजेपी चाहती है कि कुशवाहा अपनी पार्टी RLM का विलय बीजेपी में कर दें। इसके बदले में उन्हें राज्यसभा की एक सीट और उनके बेटे के लिए विधान परिषद की एक सीट का 'पैकेज' दिया जा सकता है। हालांकि, न तो आरएलएम और न ही बीजेपी ने इस मर्जर की आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन नामांकन की अंतिम तिथि (5 मार्च) के दबाव ने इस संभावित सौदे को और अधिक प्रभावी बना दिया है।
राज्यसभा का अंकगणित और एनडीए का दबदबा :
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता है। वर्तमान संख्या बल को देखें तो:
- एनडीए (NDA): 202 विधायकों के साथ एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी एनडीए के पास अतिरिक्त वोट बचेंगे, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
- महागठबंधन: विपक्षी खेमे के पास केवल 35 विधायक हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें एक भी सीट सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त वोटों की भारी आवश्यकता होगी।
नामांकन की घड़ी नजदीक है और उपेंद्र कुशवाहा की दिल्ली में होने वाली यह बैठक न केवल उनके राजनीतिक करियर की दिशा तय करेगी, बल्कि बिहार में एनडीए के नए स्वरूप की रूपरेखा भी खींचेगी। क्या कुशवाहा अपनी 'स्वतंत्र पहचान' की बलि देकर 'कमल' का दामन थामेंगे या कोई नया बीच का रास्ता निकालेंगे, यह अगले 48 घंटों में साफ हो जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
