बिहार के मोकामा़ खास क्षेत्र में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) का पहला मंदिर स्थापित होने जा रहा है। राज्य सरकार ने 10.11 एकड़ भूमि मात्र ₹1 में 99 साल की लीज़ पर दी है। यह परियोजना धार्मिक-पर्यटन विकास, आधुनिक सुविधाओं और क्षेत्रीय आर्थिक वृद्धि का बड़ा केंद्र बनने की तैयारी में है।

बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नया अध्याय लिखने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पटना जिले के मोकामा़ खास क्षेत्र में वह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, जो राज्य को राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन के केंद्रों में शामिल कर सकता है। राज्य सरकार ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) को 10.11 एकड़ भूमि मात्र ₹1 के नाममात्र लीज़ शुल्क पर 99 वर्षों के लिए आवंटित की है, ताकि यहां दक्षिण भारत के विख्यात तिरुपति मंदिर की तर्ज पर श्री वेंकटेश्वर स्वामी का भव्य मंदिर स्थापित किया जा सके।


दिसंबर 2025 की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मंदिर बिहार में TTD द्वारा संचालित पहला धार्मिक परिसर होगा। लंबे समय से उत्तर भारत में अपनी संस्थागत उपस्थिति बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा TTD अब बिहार में भी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक सेवाओं का विस्तार करेगा। मोकामा़ खास की यह भूमि जो राजकीय रिकॉर्ड में उच्च क्षमता वाले विकास क्षेत्र के रूप में पहचानी जाती है मंदिर परिसर के लिए चुनी गई है।


राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक धार्मिक स्थल बनाना नहीं, बल्कि एक समग्र सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र का निर्माण करना है, जहां आधुनिक सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था, और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि का संयुक्त विकास हो सके।


सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित मंदिर परिसर में दक्षिण भारतीय वास्तुशिल्प की छाप होगी, जैसा कि तिरुमला के प्रतिष्ठित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में दिखाई देता है। यद्यपि विस्तृत नक्शा और डिजाइन अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन प्रारम्भिक जानकारी बताती है कि इसमें:

  • विशाल गर्भगृह और प्रार्थना हॉल
  • श्रद्धालुओं के लिए विश्राम व प्रसाद सेवा केंद्र
  • सांस्कृतिक सभागार
  • आध्यात्मिक अध्ययन और सेवा केंद्र
  • आधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्री आवास

जैसे मॉडल ढाँचे शामिल हो सकते हैं। इन सबके माध्यम से यह परिसर एक धार्मिक स्थल के साथ-साथ एक धार्मिक-पर्यटन हब के रूप में विकसित होगा।


भूमि हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार और TTD के बीच औपचारिक MoU (समझौता ज्ञापन) तैयार किया जा रहा है। 99-वर्षीय लीज़ व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संस्था को दीर्घकालिक विकास और प्रबंधन में कोई बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल बिहार में बड़े धार्मिक संस्थानों को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


यह परियोजना बिहार और इसके आसपास के राज्यों के लाखों श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक सुविधाजनक कदम मानी जा रही है। अब तिरुपति दर्शन के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी श्री वेंकटेश्वर स्वामी के प्रतिमान स्वरूप में यह बड़ा और शानदार मंदिर बिहार में ही उपलब्ध होगा। इसके साथ ही:

  • स्थानीय रोजगार और व्यवसाय में वृद्धि
  • होटल, परिवहन, भोजनालय और छोटे कारोबारों में तेजी
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों और वार्षिक उत्सवों के माध्यम से आर्थिक गतिविधि
  • मोकामा़–पटना क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे का नया विकास

जैसे प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। हालाँकि भूमि आवंटन की कार्यवाही पूरी हो चुकी है, पर निर्माण कार्य की शुरुआत की तारीख, विस्तृत वास्तु डिजाइन, बजट व परियोजना समयरेखा, तिरुपति की तरह होने वाले सेवाओं/प्रसाद व्यवस्था के मॉडल अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। MoU पर हस्ताक्षर होते ही परियोजना के दूसरे चरण में निर्माण प्रक्रिया प्रारम्भ होने की संभावना है।


मोकामा़ में प्रस्तावित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, बिहार की सांस्कृतिक विरासत में एक नया विस्तार जोड़ सकता है। यह न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी नई ऊँचाई प्रदान कर सकता है। आने वाले वर्षों में यह परिसर बिहार की पहचान में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है ठीक उसी तरह जैसा तिरुपति आंध्र प्रदेश की आस्था और प्रतिष्ठा का प्रतीक है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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