10-10 हजार रुपये के 'वोटर घूस' कांड ने मचाया तहलका ; Prashant Kishor की सुप्रीम कोर्ट को गुहार
Prashant Kishor की जन सुराज पार्टी ने बिहार चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में आरोप है कि आचार संहिता के दौरान 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के तहत 35 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये बांटे गए। क्या दोबारा होंगे बिहार विधानसभा चुनाव? अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस बड़ी याचिका और कोर्ट की आगामी सुनवाई पर विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Prashant Kishor Jan Suraaj petition in Supreme Court : बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों को चुनौती देते हुए प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को दाखिल इस याचिका ने चुनावी शुचिता और सत्ताधारी दल द्वारा घोषित 'कल्याणकारी योजनाओं' के समय पर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' पर गंभीर आरोप :
जन सुराज की याचिका का मुख्य केंद्र बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' है। पार्टी का दावा है कि यह योजना केवल लोकलुभावन वादा नहीं, बल्कि मतदाताओं को सीधे प्रभावित करने का एक सुनियोजित प्रयास था।
- कैश ट्रांसफर का आरोप : याचिका के अनुसार, चुनाव आचार संहिता (MCC) लागू होने के बावजूद सरकार ने लगभग 25 से 35 लाख महिला लाभार्थियों के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए।
- नए लाभार्थियों का समावेश : आरोप है कि चुनाव के ठीक पहले नियमों को ताक पर रखकर नए नाम जोड़े गए, जो चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने जैसा है
- JEEVIKA का दुरुपयोग : याचिका में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है कि 'जीविका' समूह की 1.8 लाख महिलाओं को पोलिंग बूथों पर नियुक्त किया गया, जो निष्पक्ष मतदान के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
संवैधानिक उल्लंघन और कानूनी पेच :
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस संवेदनशील मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। जन सुराज ने अनुच्छेद 32 के तहत अपनी रिट याचिका में इसे संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का उल्लंघन बताया है:
- उल्लंघन : याचिका में अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21, 112, 202 और 324 (चुनाव आयोग की शक्तियां) का हवाला दिया गया है।
- चुनाव आयोग को निर्देश : कोर्ट से मांग की गई है कि वह चुनाव आयोग को ऐसी गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दे, जिससे सत्ताधारी पार्टियां चुनाव से कम से कम 6 महीने पहले ही मुफ्त योजनाओं की घोषणा कर सकें।
चुनाव रद्द करने की मांग :
जन सुराज ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए मांग की है कि बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए। उनका तर्क है कि 6 और 11 नवंबर को हुए मतदान के दौरान 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) ने मतदाताओं के निर्णय को अनुचित तरीके से प्रभावित किया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
