भीलवाड़ा के गायत्री माता मंदिर में 7 जनवरी से तीन दिवसीय संगीतमय 'नानी बाई का मायरा' का भव्य आयोजन होगा। श्री जय राम दास जी महाराज के सानिध्य में संत रज प्रहलाद 'मुस्कान' सुनाएंगे नानी बाई की अमर कथा। भव्य कलश यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों से सराबोर इस आयोजन की पूरी जानकारी और समय सारणी के लिए पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के आध्यात्मिक आकाश में एक बार फिर भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। शहर के कोटा रोड, अहिंसा सर्किल स्थित श्री गायत्री माता मंदिर एवं सीताराम सेवा आश्रम के पावन प्रांगण में आगामी 7 जनवरी से तीन दिवसीय संगीतमय 'नानी बाई का मायरा' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। भक्ति, त्याग और समर्पण की इस अमर गाथा का आयोजन श्री श्री 1008 श्री जय राम दास जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है, जो क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा।

इस धार्मिक अनुष्ठान की व्यापक तैयारियों के बीच, सत्संग मंच संचालक कवि रामनिवास रोनीराज ने आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि प्रख्यात कथा वाचक संत रज प्रहलाद 'मुस्कान' अपनी ओजस्वी वाणी और सुमधुर भजनों के माध्यम से भक्तों को नानी बाई के मायरे की भावपूर्ण कथा का रसपान कराएंगे। यह तीन दिवसीय महोत्सव 7 जनवरी, बुधवार से प्रारंभ होकर 9 जनवरी तक अनवरत चलेगा, जिसमें नरसी मेहता की अनन्य कृष्ण भक्ति और भगवान द्वारा किए गए चमत्कारिक विधान का वर्णन किया जाएगा।

कार्यक्रम का श्रीगणेश 7 जनवरी को प्रातः 9.00 बजे एक विशाल एवं भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। मंगल कलशों के साथ निकलने वाली यह शोभायात्रा श्री रामेश्वर महादेव एवं पूगता बालाजी मंदिर (शिवनगर) से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रारंभ होगी, जो तिलक नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल गायत्री माता मंदिर पहुंचेगी। इस यात्रा के माध्यम से समूचे क्षेत्र को धर्ममयी वातावरण में सराबोर करने का प्रयास किया गया है। कलश यात्रा के समापन के पश्चात, दोपहर ठीक 1.00 बजे से प्रथम दिवस की कथा का विधिवत शुभारंभ होगा। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1.00 बजे से सायं 4.00 बजे तक निर्धारित किया गया है।

सत्संग कमेटी ने धर्मनगरी भीलवाड़ा के समस्त धर्मप्रेमी जनता और श्रद्धालुओं से इस पावन आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होने का आह्वान किया है। आयोजन समिति का मानना है कि नानी बाई का मायरा केवल एक कथा नहीं, बल्कि ईश्वर पर अटूट विश्वास की प्रतिध्वनि है। भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए आश्रम परिसर में विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में कथा श्रवण कर पुण्य के सहभागी बन सकें और अपने जीवन को धन्य कर सकें।

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