भरतपुर में शहद उत्पादन को 'एक जिला एक उत्पाद' के तहत नई ऊंचाई देने के लिए मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है। मई गुर्जर में बनने वाले इस केंद्र से 700 किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण और निःशुल्क बी-कीपिंग किट मिलेगी। जनक राज मीना के निर्देशन में शुरू होने वाली यह पहल जिले में रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

भरतपुर। राजस्थान के पूर्वी द्वार भरतपुर जिले में अब 'मीठी क्रांति' के जरिए समृद्धि की नई इबारत लिखी जा रही है। बढ़ती आबादी और कृषि जोतों के घटते आकार के बीच रोजगार के संकट से जूझ रहे किसानों के लिए मधुमक्खी पालन एक सुनहरे विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है। राज्य सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत भरतपुर ने शहद को अपनी विशिष्ट पहचान के रूप में चुना है, जिसके माध्यम से अब जिले के हजारों परिवारों की किस्मत संवरने वाली है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए जिले में मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का खाका तैयार किया गया है।

भरतपुर की धरती पर शहद उत्पादन का सफर वर्ष 1997 में शुरू हुआ था, जो आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान में जिले की लगभग 585 इकाइयों के माध्यम से 1600 लोगों को प्रत्यक्ष और 2000 से अधिक लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। जिले में सक्रिय 80 हजार मधुमक्खी बॉक्स सालाना 2400 मीट्रिक टन शहद और 48 मीट्रिक टन मोम उगल रहे हैं। अब तक स्थानीय मधुमक्खी पालकों के लिए बृज हनी जैसी निजी इकाइयां ही मुख्य खरीदार रही हैं, लेकिन सरकारी हस्तक्षेप और नई सुविधाओं के आने से यह परिदृश्य पूरी तरह बदलने वाला है।

उद्यानिकी विभाग के उप निदेशक जनक राज मीना ने इस महत्वाकांक्षी योजना का विवरण साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा 2023-24 के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर स्थित ग्राम मई गुर्जर में 9.83 हेक्टेयर भूमि इस उत्कृष्टता केंद्र के लिए आवंटित की गई है। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा यहाँ अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यह केंद्र केवल एक सरकारी इमारत मात्र नहीं होगा, बल्कि शहद की दुनिया का एक संपूर्ण हब बनेगा। यहाँ प्रशिक्षण ऑडिटोरियम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल, शहद की शुद्धता जांचने वाली प्रयोगशाला, मोम शीट मेकिंग कक्ष, बॉटलिंग यूनिट और विशाल स्टोरेज गोदाम जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, भावी पीढ़ी को इस उद्योग से जोड़ने के लिए यहाँ एक 'चिल्ड्रन बी-पार्क' और प्रदर्शन के लिए 'लाइव बी पार्क' भी बनाया जाएगा।

जनक राज मीना ने पंच गौरव कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा कि पहले चरण में आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले के सेवर, नदबई, वैर, भुसावर, उच्चैन, बयाना और रूपवास ब्लॉक के 700 किसानों और मधुमक्खी पालकों को लक्ष्य बनाकर 14 विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के लिए 14 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी पर 1000 रुपये का व्यय तय है। किसानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए निःशुल्क बी-कीपिंग किट भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन बढ़ा सकें।

शहद केवल एक व्यापारिक वस्तु नहीं बल्कि प्रकृति का वह अमृत है जिसे आयुर्वेद में संजीवनी के समान माना गया है। इसकी वैज्ञानिक महत्ता को रेखांकित करते हुए उप निदेशक ने बताया कि शहद में 39 प्रतिशत फ्रक्टोज और 34 प्रतिशत ग्लूकोज के साथ-साथ विटामिन, अमीनो एसिड और दुर्लभ खनिज पाए जाते हैं। इसके औषधीय गुण जैसे एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-ऑक्सीडेंट इसे हृदय स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अद्वितीय बनाते हैं। भरतपुर में इस उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना न केवल किसानों की आय को दोगुना करने का माध्यम बनेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भरतपुर के शहद को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में भी स्थापित करेगी। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्वावलंबन की ओर ले जाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

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