भुसावर में आमलकी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने की आंवले के पेड़ की पूजा
कस्बे के विभिन्न मंदिरों में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर विशेष अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की।

भुसावर के कोठी वाले हनुमान मंदिर परिसर में शुक्रवार को आमलकी एकादशी के अवसर पर आंवले के वृक्ष की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना करतीं महिला श्रद्धालु।
भुसावर कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र में आज शुक्रवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी (आंवला) एकादशी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। पंचांग के अनुसार होली पर्व के शुरू होने से ठीक चार दिन पहले आने वाली इस आंवला एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है।
शुभ संयोग और शास्त्रीय विधि-विधान
आंवला एकादशी के पावन अवसर पर शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं द्वारा विधि विधान पूर्वक श्रद्धा अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और आयुष्मान योग में सौभाग्य में आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कहानी सुनी और भगवान विष्णु जी की प्रतिमा (मूर्ति) की पूजा कर मनोकामनाएं मांगी। विद्वान पंडितों ने जानकारी देते हुए बताया कि "हिन्दू कैलेंडर में वैसे तो साल भर में 24 एकादशी आती है, लेकिन फाल्गुन महीने की इस एकादशी को आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है, इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती जी को गोना कराकर पहली बार काशी लाए थे।"
तिथि समय और धार्मिक मान्यता
पंचांग के अनुसार आमलकी एकादशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी की देर रात (यानी 27 फरवरी को 12 बजकर 33 मिनट एएम) से हुई और आमलकी एकादशी का समापन 27 फरवरी की रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। कस्बे के प्रमुख कोठी वाले हनुमान जी मन्दिर परिसर, हूंकारेश्वर महादेव मन्दिर, भगत राज वाले हनुमानजी मन्दिर, पारवाले हनुमानजी मन्दिर, दाऊजी महाराज मन्दिर, लक्ष्मण जी मन्दिर, चतुर्भुज जी मन्दिर, बनखण्डी वाले हनुमानजी मन्दिर, राधा कृष्ण युगल किशोर जी मन्दिर, पंचमुखी हनुमान जी मन्दिर आदि सहित विभिन्न मन्दिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
मंदिरों में अभिषेक और हरि संकीर्तन
विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए अपनी अरदास लगाई गई। मंदिरों में विशेष सजावट की गई और भगवान विष्णु जी एवं माता लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना कर गाय के कच्चे दूध से अभिषेक किया गया। भक्तों ने माता को सुहाग की सामग्री जैसे लाल चुनरी, चूड़ी और सिन्दूर अर्पित किया। आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कलावा और सूती धागा लपेटकर 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप किया गया और कहानी सुनकर भोग लगाया गया।
उल्लासपूर्ण वातावरण और आशीर्वाद
मन्दिरों में ढोलक, झांझ, मजीरा की थाप पर भजनों के माध्यम एवं हरि संकीर्तन से भगवान को रिझाते हुए नृत्य कर भक्तों ने अपनी हाजिरी लगाई। इस अवसर पर एक दूसरे को गुलाल का टीका लगाकर और अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। अंत में भगवान से मोक्ष की प्राप्ति की कामना के साथ यह पर्व संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau
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