भरतपुर: पक्षियों के स्वर्ग केवलादेव नेशनल पार्क में 'अजगरों' का साम्राज्य, सर्दियों की धूप में दिख रहा रोमांचक नजारा
भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में इन दिनों पक्षियों के साथ-साथ 300 से अधिक विशालकाय इंडियन रॉक पायथन्स का दबदबा देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड में 22 फुट तक लंबे अजगर धूप सेंकने के लिए बाहर निकल रहे हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण और रोमांच का केंद्र बने हुए हैं। जिला कलेक्टर कमल चौधरी और पर्यटकों ने इस अद्भुत नजारे की सराहना की है। जानिए क्यों यह उद्यान अजगरों का पसंदीदा बसेरा बना हुआ है।

भरतपुर का विश्व विख्यात केवलादेव नेशनल पार्क, जिसे दुनिया भर में पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है, इन दिनों एक अलग ही रोमांच का केंद्र बना हुआ है। पंख पसारते रंग-बिरंगे विदेशी पक्षियों के शोर के बीच यहाँ की धरती पर सरकते विशालकाय अजगरों ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कड़ाके की ठंड के बीच इस उद्यान में करीब 300 से अधिक विशालकाय अजगरों का डेरा है, जो सर्दियों की गुनगुनी धूप सेंकने के लिए अपने बिलों से बाहर निकल रहे हैं। यह नजारा न केवल विस्मयकारी है, बल्कि प्रकृति के अद्भुत तालमेल को भी दर्शाता है।
उद्यान के कर्मचारी गजेंद्र सिंह के अनुसार, केवलादेव नेशनल पार्क में पाए जाने वाले इन अजगरों की लंबाई 10 से लेकर 22 फुट तक होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से 'पायथन मोलुरस' कहे जाने वाले इन जीवों को सामान्य भाषा में इंडियन रॉक पायथन या एशियन रॉक पायथन के नाम से जाना जाता है। उद्यान के भीतर एक विशेष 'पायथन एरिया' है जिसे डेंजर जोन माना जाता है। यहाँ आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है और कोई भी व्यक्ति यहाँ केवल अपने जोखिम पर ही जा सकता है। गजेंद्र सिंह बताते हैं कि यहाँ अजगरों के लिए भरपूर भोजन और अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं, साथ ही शिकारियों का भय कम होने के कारण यह स्थान उनके फलने-फूलने के लिए सबसे उपयुक्त है। ये अजगर अक्सर साही (परको पाइन) और सियार (जैकॉल) के बिलों पर कब्जा कर उन्हें अपना स्थायी निवास बना लेते हैं।
चूँकि अजगर ठंडे खून वाले जीव होते हैं, इसलिए उन्हें अत्यधिक सर्दी सहन नहीं होती। यही कारण है कि सर्दियों के मौसम में सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे के बीच ये भारी संख्या में बाहर निकलकर धूप का आनंद लेते हैं। वर्तमान में, ये अजगर न केवल अपने निर्धारित क्षेत्र में बल्कि पार्क के विभिन्न हिस्सों में भी देखे जा रहे हैं। अत्यधिक ठंड के कारण कभी-कभी ये रेंगते हुए पास के गांवों और शहर की सड़कों तक भी पहुँच जाते हैं, जो स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती और कौतूहल का विषय बन जाता है।
पर्यटन के लिहाज से यह समय बेहद खास हो गया है। दिल्ली से आए पर्यटक सी.ए. दिनेश गुप्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने यहाँ कई पायथन देखे जो अपने आप में एक अनूठा अनुभव था। उन्होंने पार्क की शांति और यहाँ के वन्यजीवों की विविधता की सराहना की। स्थानीय निवासी राहुल ने भी पुष्टि की कि उन्होंने पहले भी अजगर देखे हैं, लेकिन सर्दियों के इस मौसम में उनकी संख्या और सक्रियता देखते ही बनती है। भरतपुर के जिला कलेक्टर कमल चौधरी ने भी पार्क का दौरा किया और अजगरों की मौजूदगी देख गदगद हो गए। उन्होंने कहा कि यह सीजन प्रवासी पक्षियों और पायथन्स को देखने के लिए सबसे उपयुक्त समय है, जो भरतपुर की पर्यटन क्षमता को और मजबूती प्रदान करता है।

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