बयाना में बिजली विभाग की लापरवाही ने बमनपुरा मोहल्ले के निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। जमीन तक झूलते हाई वोल्टेज तार राहगीरों के सिर से टकरा रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायत के बावजूद अधिकारियों और लाइनमैनों की अनदेखी से कस्बे में दहशत का माहौल है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और जानें क्या है पूरा मामला।

बयाना। राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना कस्बे में बिजली विभाग की उदासीनता और अधिकारियों की अनदेखी अब आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रही है। कस्बे की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक फैला बिजली के तारों का जंजाल स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बन चुका है। आलम यह है कि कई इलाकों में हाई वोल्टेज लाइनें मौत बनकर जमीन तक झूल रही हैं, लेकिन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। आए दिन होने वाली स्पार्किंग और तारों से निकलते अंगारों ने लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।

विशेष रूप से कस्बे के बमनपुरा मोहल्ले में हालात भयावह हो चुके हैं। यहाँ बिजली के तार इतनी कम ऊँचाई पर लटक रहे हैं कि राहगीरों के सिर से टकराने की नौबत आ गई है। पैदल चलने वाले लोगों को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा है, क्योंकि जरा सी असावधानी उन्हें मौत के आगोश में धकेल सकती है। तारों के इस झूलते जाल के कारण चौपहिया वाहनों का आवागमन भी पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे स्थानीय व्यापार और दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है। मोहल्ले के निवासियों में इस स्थिति को लेकर जबरदस्त आक्रोश और दहशत का माहौल व्याप्त है।

हैरानी की बात यह है कि स्थानीय नागरिकों द्वारा इस गंभीर समस्या के बारे में बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को बार-बार लिखित और मौखिक सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और लाइनमैन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। लाइनमैनों की यह कार्यशैली सीधे तौर पर मानवीय जीवन के साथ खिलवाड़ है। शिकायत के बाद भी तारों को कसने या उन्हें सुरक्षित ऊँचाई पर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह लापरवाही न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में किसी बड़ी जनहानि की ओर भी इशारा कर रही है।

फिलहाल बयाना के लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं। बमनपुरा मोहल्ले समेत अन्य प्रभावित इलाकों में लटकते ये तार बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि समय रहते इन तारों को व्यवस्थित नहीं किया गया, तो इसकी भारी कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर किसी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा।

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