बयाना: महादेव गली में मौत का साया बना जर्जर तीन मंजिला मकान, नगरपालिका की अनदेखी से मंडरा रहा बड़ा खतरा
बयाना की महादेव गली में एक जर्जर तीन मंजिला मकान बड़े हादसे का सबब बना हुआ है। वैश्य समाज के मालिकों की अनदेखी और नगरपालिका की उदासीनता के चलते स्थानीय निवासी देवेन्द्र कुमार सहित सैकड़ों राहगीर खतरे के साये में जीने को मजबूर हैं। जानिए क्यों प्रशासन एक बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है और क्या है पूरा मामला।

बयाना। कस्बे की घनी आबादी वाली महादेव गली में स्थित एक प्राचीन तीन मंजिला मकान इन दिनों स्थानीय निवासियों के लिए काल का ग्रास बना हुआ है। वर्षों पुराना यह जर्जर ढांचा न केवल अपनी नींव खो चुका है, बल्कि कभी भी एक भयावह हादसे को निमंत्रण दे सकता है। विडंबना यह है कि इस गंभीर खतरे की सूचना होने के बावजूद नगरपालिका प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा रोष और भय व्याप्त है।
स्थानीय निवासी देवेन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विशालकाय मकान वैश्य समाज के व्यक्तियों का है, जो लंबे समय से अत्यंत जर्जर और गिराऊ अवस्था में खड़ा है। सुरक्षा की दृष्टि से यह मकान इतना कमजोर हो चुका है कि पूर्व में भी इसके भारी-भरकम छज्जे टूटकर नीचे गिर चुके हैं। गनीमत रही कि उस समय कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन बार-बार गिरते मलबे ने राहगीरों और पड़ोसियों की रातों की नींद उड़ा दी है। जिस मार्ग पर यह खंडहरनुमा मकान खड़ा है, वह क्षेत्र का मुख्य आवागमन पथ है, जहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों लोग, बच्चे और बुजुर्ग गुजरते हैं। इसके आसपास अन्य रिहायशी मकान भी सटे हुए हैं, जिससे यदि यह ढांचा गिरता है, तो एक साथ कई परिवार इसकी चपेट में आ सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, इस विवादित और खतरनाक संपत्ति के स्वामी अशोक व पप्पू पुत्र मनोहारी, सतीश पुत्र बाबूलाल तथा तारा पुत्र रघुनाथ हैं। ये सभी वर्तमान में कस्बे के सुभाष चौक क्षेत्र में अपने नवीन आवासों में सुख-सुविधाओं के साथ रह रहे हैं, लेकिन महादेव गली स्थित इस पुश्तैनी खंडहर को सुरक्षित करवाने या हटवाने के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। मोहल्ले वासियों ने कई बार मालिकों से इस जर्जर निर्माण को ढहाने का आग्रह किया, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले में घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। देवेन्द्र कुमार सहित अन्य मोहल्ले वासियों ने नगरपालिका प्रशासन को इस संबंध में लिखित शिकायत प्रेषित कर कार्रवाई की मांग की थी, किंतु कागजी औपचारिकताओं के आगे धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय जनता अब शासन और प्रशासन से गुहार लगा रही है कि किसी मासूम की जान जाने का इंतजार करने के बजाय समय रहते इस 'डेथ ट्रैप' को हटवाया जाए। यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि नगरपालिका कब अपनी उदासीनता त्याग कर जनहित में इस संभावित त्रासदी को टालने के लिए सक्रिय होती है।

Pratahkal Bureau
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