भरतपुर में आयुष मंत्रालय और आयुर्वेद विभाग द्वारा आयोजित दस दिवसीय आवासीय नि:शुल्क शल्य चिकित्सा शिविर का समापन हुआ। क्षार सूत्र विधि से 96 जटिल रोगियों के सफल ऑपरेशन किए गए और 3412 से अधिक लोगों को परामर्श मिला। डॉ. हरदेव तराना और डॉ. सतीश लवानिया समेत कई विशेषज्ञों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस शिविर ने आयुर्वेद की शक्ति को पुनः स्थापित किया है।

भरतपुर। चिकित्सा और सेवा के अनूठे संगम के साथ भरतपुर के बैलारा कलां स्थित पंचायत प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित दस दिवसीय आवासीय नि:शुल्क आयुर्वेद क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सफलतापूर्वक समापन हो गया। आयुष मंत्रालय भारत सरकार और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने न केवल आधुनिक चिकित्सा जगत के समक्ष आयुर्वेद की प्राचीन 'क्षार सूत्र' पद्धति की प्रभावशीलता को सिद्ध किया, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन में स्वास्थ्य की नई किरण बिखेरी है। शिविर के अंतिम दिन मुख्य अतिथि विभाग संघ चालक भागीरथ सिंह ने चिकित्सा जगत के प्रति समर्पण को सेवा का सर्वोच्च रूप बताया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा चिकित्सा के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता अतिरिक्त निदेशक डॉ. सतीश लवानिया ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुशील पाराशर, पूर्व उपनिदेशक डॉ. सतीश पाराशर, पूर्व रसायन शाला प्रबंधक डॉ. गिरीश शर्मा, पूर्व उपनिदेशक डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. धनेश शर्मा, डॉ. मिथलेश कुमार, उपनिदेशक डॉ. साधुराम शर्मा, सहायक निदेशक डॉ. प्रेम सिंह कुम्हेर डीग, सहायक निदेशक डॉ. राजेश जांगिड़ और प्रशिक्षण केन्द्र के प्रोजेक्टर संदीप कटारा उपस्थित रहे।

शिविर प्रभारी डॉ. हरदेव तराना ने दस दिवसीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए जानकारी दी कि यह शिविर अर्श (बवासीर), भगंदर (फिस्टुला) और परिकर्तिका (फिशर) जैसी गंभीर व्याधियों से जूझ रहे मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ। शिविर के दौरान कुल 96 जटिल रोगियों का अत्याधुनिक क्षार सूत्र विधि से सफल ऑपरेशन किया गया, जिन्हें आवासीय सुविधा के साथ विशेषज्ञ देखरेख में रखा गया। इसके अतिरिक्त, ओपीडी के माध्यम से विभिन्न रोगों से पीड़ित 3412 रोगियों का निःशुल्क परामर्श कर उन्हें औषधियां वितरित की गईं।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भागीरथ सिंह ने चिकित्सा कर्मियों को प्रेरित किया कि वे रोगियों की निस्वार्थ भाव से सेवा कर मानवता के धर्म का पालन करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने आमजन से अपनी जीवनशैली और खान-पान को आयुर्वेद के अनुरूप ढालने और नियमित योग-व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर शल्य चिकित्सा टीम के अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मठ कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। यह शिविर भरतपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता और आयुर्वेद के प्रति जन-विश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

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