बयाना नगरपालिका के पास जलभराव और कीचड़ से जनता त्रस्त है। पूर्व सांसद रंजीता कोली के आवास और दमदमा रोड जाने वाले मुख्य मार्ग की बदहाली ने प्रशासन की पोल खोल दी है। देवीसिंह प्रजापत की विशेष रिपोर्ट में जानें कैसे अधिकारी अपनी नाक के नीचे फैली गंदगी को अनदेखा कर रहे हैं और जनता बीमारियों के साये में जीने को मजबूर है।

बयाना। "अंधेर नगरी, चौपट राजा" की कहावत आज भरतपुर जिले के बयाना कस्बे में सटीक चरितार्थ हो रही है, जहाँ प्रशासन की नाक के नीचे आम जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। बयाना नगर पालिका प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की घोर उदासीनता का आलम यह है कि शहर की एक प्रमुख सड़क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। रिपोर्टर देवीसिंह प्रजापत की पड़ताल के अनुसार, बयाना से दमदमा रोड जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नगरपालिका कार्यालय के समीप ही लंबे समय से गंदा पानी जमा है, जिसने पूरी सड़क को कीचड़ के टापू में तब्दील कर दिया है। विडंबना यह है कि जिस रास्ते से जिम्मेदार अधिकारी प्रतिदिन गुजरते हैं, वही मार्ग आज दुर्घटनाओं और बीमारियों का केंद्र बन चुका है।

इस जलभराव के कारण स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पैदल राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है, वहीं दुपहिया वाहन चालक आए दिन इस कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि जमा हुए दूषित पानी से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने उनके घरों में रहना मुश्किल कर दिया है। यह केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गई है, क्योंकि ठहरे हुए पानी से मच्छर और मौसमी बीमारियों के पनपने की आशंका प्रबल हो गई है।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह समस्या नगरपालिका कार्यालय से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसी मार्ग का उपयोग न केवल आम जनता, बल्कि पूर्व सांसद रंजीता कोली के आवास तक पहुँचने, गैस गोदाम जाने और दमदमा सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इतने महत्वपूर्ण और रसूखदार व्यक्तियों के आवागमन वाले मार्ग की यह दुर्दशा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जब प्रशासनिक अमला खुद अपनी चौखट पर फैली गंदगी को नहीं देख पा रहा, तो वह कस्बे के अन्य हिस्सों का क्या उद्धार करेगा। वर्तमान में क्षेत्रवासियों की पुरजोर मांग है कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागे और जल्द से जल्द जलनिकासी की सुचारू व्यवस्था कर सड़क की मरम्मत कराए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस जनसमस्या पर कब संज्ञान लेते हैं या फिर जनता इसी तरह कीचड़ और बदबू के बीच जीने को विवश रहेगी।

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