भरतपुर जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कस्टम हायरिंग सेंटर योजना के तहत 6 महिला स्वयं सहायता समूहों को ट्रैक्टरों की चाबी सौंपकर कृषि विकास के नए युग की शुरुआत की। रोटावेटर और थ्रेसर जैसे आधुनिक उपकरणों से लैस ये सेंटर लघु किसानों को सस्ती दर पर मशीनें उपलब्ध कराएंगे और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भरतपुर | समाचार सेवा भरतपुर जिले के कृषि परिदृश्य में शुक्रवार को एक युगांतरकारी परिवर्तन की नींव रखी गई, जब जिला कलक्टर कमर चौधरी ने ग्रामीण महिलाओं के हाथों में विकास का 'स्टेयरिंग' सौंपते हुए कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का शंखनाद किया। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित एक भव्य गरिमामयी समारोह के दौरान जिला कलक्टर ने कलस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) से जुड़ी महिलाओं के छह स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि यंत्रों से सुसज्जित ट्रैक्टरों की चाबियां भेंट कीं और उन्हें हरी झंडी दिखाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया। इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह, अतिरिक्त कलक्टर प्रशासन घनश्याम शर्मा और राजीविका की जिला प्रबंधक भारती भारद्वाज सहित जिले भर से आईं स्वयं सहायता समूहों की जागरूक महिलाएं इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनीं।

जिला कलक्टर कमर चौधरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की उस दूरगामी सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक संसाधनों के माध्यम से किसानों की आय को दोगुना करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस योजना के माध्यम से जिले के लघु एवं सीमांत किसानों को अब महंगे कृषि उपकरण खरीदने की मजबूरी नहीं होगी, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रियायती दरों पर रोटावेटर, थ्रेसर और ट्रॉली जैसे उन्नत यंत्र किराए पर मिल सकेंगे। इससे न केवल खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि समय पर कार्य पूर्ण होने से उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मॉडल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूती प्रदान करेगा।

प्रशासनिक और वित्तीय बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए सीईओ जिला परिषद मृदुल सिंह ने कहा कि स्थानीय स्तर पर आधुनिक यंत्रों की उपलब्धता छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। राजीविका की जिला प्रबंधक भारती भारद्वाज ने योजना के तकनीकी पक्ष को स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक कलस्टर लेवल फेडरेशन को ट्रैक्टर के लिए 7 लाख रुपये की भारी सब्सिडी प्रदान की गई है। निवेश की शेष राशि का प्रबंधन स्वयं समूहों द्वारा किया गया है, जबकि इन यंत्रों के स्वामित्व और संचालन का पूर्ण अधिकार महिलाओं के पास सुरक्षित रहेगा।

इस नवाचार के तहत जिले के छह प्रमुख केंद्रों पर विकास की लौ प्रज्वलित की गई है, जिनमें उच्चैन का 'आरती', सेवर का 'जागो सखी', कुम्हेर का 'प्रतिज्ञा', भुसावर का 'महिला शक्ति', बयाना का 'सफलता' और रूपवास का 'हरियाली' कलस्टर लेवल फेडरेशन शामिल है। यह केवल मशीनों का वितरण नहीं है, बल्कि भरतपुर के ग्रामीण अंचल में महिला नेतृत्व, रोजगार सृजन और तकनीकी समावेश की एक नई लहर है। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ये कस्टम हायरिंग सेंटर भविष्य में कृषि क्षेत्र में नवाचार के केंद्र बनेंगे, जिससे भरतपुर का किसान और ग्रामीण नारी शक्ति दोनों ही आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर होंगे।

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